ये मेरा पहला ब्लॉग है । कुछ लिखने की सोच रहा हु मगर शब्द नहीं मिल रहे।
वैसे तो मै कोई टेक्निकल लेखक नहीं हु मगर आज मन कर रहा है की कुछ लिख ही दु। कुछ दिनों से बड़ा उदास सा महसूस कर रहा हु।
सुना है यमुना का पानी खतरे से ऊपर हो गया है, लोग कभी बोलते है बारिश नहीं होती, जब आज भगवान् इन पे महरबान हो रहा है तो ये इसे कुदरत का कहर समझ रहे है। वो कहावत है ना की जब उप्पर वाला देता है तो छप्पर फाड़ के देता है वही कहानी सच हो रही है। परेसान तो वो लोग है जो उस लहर के कहर से गुजर रहे है।
गया था मै एक दिन उस तरफ यमुना के नजदीक उन लोगो का बसेरा है, बेचारे बड़े असहाय है, झुग्गी झोपडी मै रहते है वो लोग, उनके पास कोई और विकल्प नहीं है।
सुना था की दो हजार बारह मै दुनिया का अंत है लकिन लगता है दुनिया मै ब्र्हस्ताचार ज्यादा बढ़ गया है इस लिए भगवान भी नाराज़ हो गया है.
sach kaha mitr...
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